About Us

The vision of the Wagdevi Foundation is to create exemplary administrative personalities who will enrich the cultural, social, and national grandeur of India, a country that witnessed the reigns of emperors like Ikshvaku, Yayati, Anaranya, Rama, and Bharata; a country where great empires were nurtured by Ajatashatru, Chandragupta, Ashoka the Great, and Krishnadevaraya; a land where the bright history of civilization shines through the emperors Vikramaditya and Bhoja; a nation that embodies the consciousness of the nation, ennobled by the likes of Maharana Pratap, Raja Pundja, Chhatrapati Shivaji, Ranjit Singh, Raja Shankar Shah, and Rani Kamalapati; a glorious India that has the resolve to enrich the cultural, social, and national grandeur of the past, struggle in the present, and lead the entire world in the future, thereby bringing pride to humanity. 

यथा व्याप्तमिदं विश्वं यां विनैतन्न भासते।

या च सर्वमिदं देवीम वाग्देवी तामुपास्महे।।

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चक्रवर्ती सम्राटों का भारत जिसमें इक्ष्वाकु, ययाति, अनरण्यक, राम, भरत से तपस्वी रहे, महाजनपदों का भारत जिसे अजातशत्रु, चंद्रगुप्त, अशोक महान, कृष्णदेवराय ने पल्लवित किया, संस्कृति का उज्ज्वल चरित्र यहां सम्राट विक्रमादित्य एवं भोज से गौरव पाता है, राष्ट्र की चैतन्यता का भारत जिसे महाराणा प्रताप, राजा पुंजा, छत्रपति शिवाजी, रणजीतसिंह, राजा शंकरशाह, रानी कमलापति ने परिष्कृत किया ऐसे महान भारत के सांस्कृतिक, सामाजिक, राष्ट्रीय वैभव को समृद्ध करने वाले प्रशासनिक व्यक्तित्वों के निर्माण के संकल्प को लेकर वाग्देवी संस्थान की परिकल्पना की गई है जहां भावी पीढ़ी में अतीत का गौरव, वर्तमान का संघर्ष एवं भविष्य का भारत सम्पूर्ण विश्व का नेतृत्व कर मानवता को गर्वित करेगा।

संस्थापक :मुकेश मोलवा सर

धर्म और संस्कृति की अद्भुत धरा मध्य प्रदेश के धार जिले के रतनपुरा में जन्मे श्री मुकेश मोलवा जी एक कवि, दार्शनिक, चिंतक, शिक्षाविद के रूप में विख्यात, राष्ट्र के प्रति समर्पित, भारत के लाखों युवाओं के प्रेरणास्रोत, धर्म एवं संस्कृति के पोषक हैं।

हिन्दी साहित्य में  एम. ए. और प्रबंधन में एमबीए करने के पश्चात साहित्य जगत में धर्म संबंधित विषयों को वृहद रूप दे कर सर्वसाधारण को धर्म की अहमियत से अवगत कराने हेतु अपनी लेखन शैली द्वारा अनेक ग्रन्थों की रचना की।
जिनमें प्रमुख रूप से धेनु ही धर्म, साध्वी सरयू के तट, शिलान्यास जैसे ग्रंथ सम्मिलित हैं।
कवि का ग्रन्थों सहित काव्य में भी अहर्निश विशेष योगदान रहा है जिसके अंतर्गत विभिन्न अनुपम कविताओं की रचना उन्होंने की हैं जैसे महाकाल, विक्रमादित्य, भोजशाला, पेशवा बाजीराव, हरिसिंह नलवा, महाराणा प्रताप, चन्द्रशेखर आज़ाद, सुभाषचन्द्र बोस, मुझे गर्व में हिन्दू हूँ, भारतीय सेना, देहाती महिला, नरेन्द्र मोदी आदि।

साहित्य जगत में अहम भूमिका निभाते हुए मुकेश मोलवा जी को हिंदू गौरव, भामाशाह सम्मान, कवि रत्न, हिंदू वीर वाणी, बालावर सिंह काव्य सम्मान, युवा गौरव, काव्य महारथी, शब्द साधक, नरेन्द्र के नरेन्द्र, अक्षर ज्योति, मालव काव्य रत्न सहित अनेक सम्मान से सम्मानित किया गया हैं।

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