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चन्द्रगुप्त मौर्य(320 ईपू-298ईपू)

 भारत के महान शासक जिनके प्रशासन का उद्देश्य इसे लोकहितकारी बनाना था, चन्द्रगुप्त ने विकास तथा सुदृढ़ीकरण के साथ ही शोषण तथा विघटन पर अंकुश लगाकर जनता का जीवन खुशहाल बनाने के लिए जाने जाते है

अशोक महान (269 ईपू-232 ईपू)

सम्राट अशोक अपने कालखंड के विश्व के सर्वाधिक शक्तिशाली सम्राट थे, चक्रवर्ती सम्राट अशोक उपाधि जिसका अर्थ सम्राटों के सम्राट केवल अशोक महान को कहा जाता है

पुष्यमित्र शुंग (185-147 ईपू)

पुष्यमित्र शुंग को शुंग वंश का संस्थापक माना जाता है, इनके काल मे भागवत धर्म का उदय एवं विकास हुआ, इन्होंने 2 अश्वमेध यज्ञ कराए थे, इनके पुरोहित पतंजलि 

विक्रमादित्य (102 ईपू- 19 ईसवी)

विक्रमादित्य ने विक्रम संवत की शुरुआत 57 ई.पू. में शकों को हराने के बाद की, और कालिदास द्वारा लिखित ज्योतिर्विदभरणम के अनुसार राजा विक्रमादित्य ने रोमन राजा जूलियस सीजर को भी हराया था। उन्होंने पूरे एशिया पर अपना शासन व्यवस्थित किया था। अरब पर इनके शासन का प्रमाण सायार-उल-ओकुल ग्रंथ के पृष्ठ संख्या 315 से मिलता है, इस ग्रंथ की रचना अरबी कवि जरहाम कितनोई ने की। यह ग्रंथ वर्तमान में इस्तांबुल शहर के प्रसिद्ध पुस्तकालय मकतब-ए-सुल्तानिया में स्थित है, जिसे अब गलाटसराय लिसेसी स्कूल का नाम दिया गया है

राजा भोज (1000-1055 ईसवी)

माँ वाग्देवी के उपासक राजा भोज अपनी प्रशासनिक दक्षता तथा साहित्य प्रेम के लिए विश्व मे प्रसिद्ध है, धर्म , खगोल विद्या, कला, कोशरचना, भवननिर्माण, काव्य, औषधशास्त्र आदि विभिन्न विषयों पर पुस्तकें लिखी हैं जो अब भी विद्यमान हैं। इनके समय में कवियों को राज्य से आश्रय मिला था। इनकी विद्वता के कारण जनमानस में एक कहावत प्रचलित हुई- कहाँ राजा भोज, कहाँ गांगेय, तैलंग। युक्तिकल्पतरु तथा राज मार्तंड राजा भोज के लिखे अद्वितीय ग्रँथ है

कृष्णदेवरॉय

कृष्णदेवराय (1471-1529 ई. ; राज्यकाल 1509-1529 ई) विजयनगर के सर्वाधिक कीर्तिवान सम्राट थे। वे स्वयं कवि और कवियों के संरक्षक थे। तेलुगु भाषा में उनका काव्य अमुक्तमाल्यद साहित्य का एक रत्न है। तेलुगु भाषा के आठ प्रसिद्ध कवि इनके दरबार में थे जो अष्टदिग्गज के नाम से प्रसिद्ध थे।

महाराणा प्रताप

( ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया रविवार विक्रम संवत 1597 तदनुसार 9 मई 1540 – 19 जनवरी 1597) उदयपुर, मेवाड़ में सिसोदिया राजवंश के राजा उनका नाम इतिहास में वीरता, शौर्य, त्याग, पराक्रम और दृढ प्रण के लिये अमर है।

 

छत्रपति शिवाजीराजे भोसले (1630-1680 ई.)

(1630-1680 ई.) भारत के एक महान राजा एवं रणनीतिकार थे जिन्होंने 1674 ई. में पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी। इसके लिए उन्होंने मुगल साम्राज्य के शासक औरंगज़ेब से संघर्ष किया। सन् 1674 में रायगढ़ में उनका राज्याभिषेक हुआ और वह “छत्रपति” बने। हिंदवी स्वराज्य के स्वप्नद्रष्टा शिवाजी कहे जाते है।

 

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